आईआईएफएल सिक्योरिटीज का चौथी तिमाही में शुद्ध लाभ दोगुना होकर 180.4 करोड़ रुपये
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आईआईएफएल सिक्योरिटीज का चौथी तिमाही में शुद्ध लाभ दोगुना होकर 180.4 करोड़ रुपये

आईआईएफएल सिक्योरिटीज का चौथी तिमाही में शुद्ध लाभ दोगुना होकर 180.4 करोड़ रुपये

भारत को विनिर्माण क्षेत्र में तेजी लाने की जररूत : सीतारमण

प्रीमियम कार्यालय स्थान की मांग 2024 में सात करोड़ वर्ग फुट से अधिक रहने की संभावना: सीएंडडब्ल्यू इंडिया प्रमुख

नई दिल्ली
 आईआईएफएल सिक्योरिटीज का जनवरी-मार्च तिमाही में शुद्ध लाभ दोगुना होकर 180.4 करोड़ रुपये रहा। कंपनी का पिछले साल समान अवधि में मुनाफा 86.4 करोड़ रुपये था।

आईआईएफएल सिक्योरिटीज ने एक बयान में कहा, वित्त वर्ष 2023-24 की चौथी (जनवरी-मार्च) तिमाही में कंपनी की आय सालाना आधार पर 74 प्रतिशत बढ़कर 704.4 करोड़ रुपये हो गई।

आईआईएफएल सिक्योरिटीज के चेयरमैन वेंकटरमन ने कहा, ‘‘हमने अपने सभी व्यावसायिक क्षेत्रों में मजबूत वृद्धि देखी। हमारी संस्थागत ब्रोकिंग और निवेश बैंकिंग फ्रेंचाइजी ने शानदार परिचालन प्रदर्शन के साथ अपनी प्रतिस्पर्धी स्थिति में काफी सुधार किया है…’’

समूचे वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी का शुद्ध लाभ बढ़कर 512.1 करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। कुल आय 63 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 2,231.3 करोड़ रुपये रही।

कंपनी के निदेशक मंडल ने वित्त वर्ष 2023-2024 के लिए दो रुपये अंकित मूल्य के प्रति शेयर पर तीन रुपये के अंतरिम लाभांश को मंजूरी दी है।

आईआईएफएल सिक्योरिटीज खुदरा ग्राहकों को लक्षित करते हुए म्यूचुअल फंड, बीमा, आईपीओ, बांड व वैकल्पिक निवेश फंड (एआईएफ) जैसे उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पेश करती है।

 

भारत को विनिर्माण क्षेत्र में तेजी लाने की जररूत : सीतारमण

नई दिल्ली
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि देश को वैश्विक मूल्य श्रृंखला में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनने के लिए अपने विनिर्माण क्षेत्र में तेजी लाने की जरूरत है।

सीआईआई वार्षिक व्यापार शिखर सम्मेलन में भारतीय उद्योग के प्रमुखों को संबोधित करते हुए मंत्री ने उत्पाद निर्माण और नीति समर्थन में अधिक परिष्‍करण हासिल करने की आवश्यकता को भी रेखांकित किया।

सीतारमण ने कहा, ‘‘मैं कुछ अर्थशास्त्रियों द्वारा दी गई इस सलाह के विपरीत कुछ रेखांकित करना चाहती हूं कि भारत को अब विनिर्माण पर ध्यान नहीं देना चाहिए या विनिर्माण में तेजी नहीं लानी चाहिए…। मैं इस तथ्य पर जोर देना चाहती हूं कि विनिर्माण में वृद्धि होनी चाहिए। भारत को नीतियों की मदद से वैश्विक मूल्य श्रृंखला में अपनी (विनिर्माण) हिस्सेदारी भी बढ़ानी चाहिए।’’

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन सहित कुछ अर्थशास्त्रियों ने राय व्यक्त की है कि भारत को विनिर्माण के बजाय सेवा क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए क्योंकि उसने वह अवसर गंवा दिया है। उनका कहना है कि चीन के विनिर्माण-आधारित वृद्धि मॉडल को अब और दोहराया नहीं जा सकता।

हालांकि, सीतारमण ने कहा कि विनिर्माण के विस्तार से भारत को आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी। उन्होंने उम्मीद जतायी कि भारत के पास अब भी अपनी विनिर्माण क्षमता बढ़ाने का अवसर है क्योंकि दुनिया कोविड-19 वैश्विक महामारी के बाद ‘चीन प्लस वन’ रणनीति पर ध्यान दे रही है।

‘कैपजेमिनी रिसर्च इंस्टीट्यूट’ की मई में जारी रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि यूरोप और अमेरिका में वरिष्ठ अधिकारियों के लिए निवेश स्थलों की सूची में भारत शीर्ष पर है, जो चीन पर अपनी निर्भरता कम करना चाहते हैं और अपनी विनिर्माण क्षमता का कुछ हिस्सा उभरते बाजारों में स्थानांतरित करना चाहते हैं।

सर्वेक्षण में शामिल करीब 760 अधिकारियों में से 65 प्रतिशत ने कहा कि वे भारत में उल्लेखनीय रूप से निवेश बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यह अपने आप में हमारे भारतीय उद्योग को काफी बड़ा दायरा प्रदान करता है। पीएलआई (उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन) योजना मोबाइल तथा इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्रों में भी बदलाव ला रही हैं।’’

उन्होंने कहा कि 2014 में 78 प्रतिशत आयात से निर्भरता तक, आज भारत में बिकने वाले 99 प्रतिशत मोबाइल भारत में निर्मित हैं। सीतारमण ने उदाहरण देते हुए कहा कि भारत पिछले साल 1.1 अरब अमेरिकी डॉलर के निर्यात के साथ चीन के बाहर आईफोन के लिए एप्पल का दूसरा सबसे बड़ा विनिर्माण केंद्र बन गया।

सेवा क्षेत्र पर उन्होंने कहा कि दुनिया के 50 प्रतिशत से अधिक वैश्विक क्षमता केंद्रों (जीसीसी) पर भारत का कब्जा है और यह महत्वपूर्ण घरेलू तथा वैश्विक अवसर उत्पन्न करने वाला सबसे पसंदीदा गंतव्य बना हुआ है। भारत में जीसीसी की संख्या इस समय 1,580 से अधिक हो गई है।

मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नीत सरकार भारत की वृद्धि में निजी क्षेत्र को एक भागीदार के रूप में देखती है। उन्होंने कहा, ‘‘हम निजी क्षेत्र की एक बहुत बड़ी भूमिका देखते हैं। हम वृद्धि में उनके साथ साझेदारी करना चाहेंगे। सरकार एक सुविधाप्रदाता व समर्थक के रूप में काम करेगी।’’

 

प्रीमियम कार्यालय स्थान की मांग 2024 में सात करोड़ वर्ग फुट से अधिक रहने की संभावना: सीएंडडब्ल्यू इंडिया प्रमुख

नई दिल्ली
कुशमैन एंड वेकफील्ड इंडिया के प्रमुख अंशुल जैन ने कहा कि देश के प्रमुख शहरों में प्रीमियम कार्यालय स्थान की मांग इस साल सात करोड़ वर्ग फुट से अधिक रहने की संभावना है। अब घर से काम करना भारतीय वाणिज्यिक रियल एस्टेट बाजार के लिए चिंता का विषय नहीं रह गया है।

अग्रणी वैश्विक रियल एस्टेट सलाहकारों में से एक कुशमैन एंड वेकफील्ड, वैश्विक क्षमता केंद्रों (जीसीसी) और प्रमुख क्षेत्रों में घरेलू कंपनियों की उच्च मांग के कारण भारतीय कार्यालय बाजार को लेकर उत्साहित है।

कुशमैन एंड वेकफील्ड के भारत व दक्षिण पूर्व एशिया के मुख्य कार्यकारी एवं एशिया पैसिफिक टेनेंट रिप्रेजेंटेशन के प्रमुख जैन ने ‘पीटीआई वीडियो’ को दिए साक्षात्कार में कहा, ‘‘दिलचस्प बात यह है कि भारत को अब दुनिया का कार्यालय कहा जाने लगा है। भारत में मांग एशिया और वास्तव में शेष विश्व में सबसे अधिक है।’’

उन्होंने कहा कि सात प्रमुख शहरों में भारतीय कार्यालय बाजार में बहुत मजबूत मांग देखी जा रही है, सकल पट्टे तथा शुद्ध पट्टे दोनों के स्तर कोविड-19 वैश्विक महामारी के पहले के स्तर के आसपास पहुंच गए हैं।

जैन ने कहा, ‘‘इसलिए कार्यालय बाजार के नजरिए से वर्ष 2020 को छोड़कर, निश्चित रूप से 2021, 2022 के कुछ समय और 2023 बहुत मजबूत वर्ष रहे हैं और हमें उम्मीद है कि 2024 में यह प्रवृत्ति बनी रहेगी।’’

वर्ष 2024 में मांग को लेकर पूछे जाने पर जैन ने कहा, ‘‘भारत में सकल पट्टेदारी गतिविधि इस साल सात करोड़ वर्ग फुट से अधिक बनी रहेगी। मुझे अगले कुछ वर्षों में भी यही प्रवृत्ति होती दिख रही है।’’

कुशमैन एंड वेकफील्ड के आंकड़ों अनुसार, शीर्ष आठ शहरों में कैलेंडर वर्ष 2023 में सकल कार्यालय पट्टेदारी रिकॉर्ड 7.46 करोड़ वर्ग फुट थी, जबकि कार्यालय स्थान शुद्ध पट्टेदारी 4.11 करोड़ वर्ग फुट थी।

 

इंटीग्रीमेडिकल में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करेगी एसआईआई

नई दिल्ली,
टीका निर्माता सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) ने इंटीग्रीमेडिकल में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने की शुक्रवार को घोषणा की।

सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) ने एक बयान में कहा, इंटीग्रीमेडिकल ने एक अमेरिकी पेटेंट इंजेक्शन सिस्टम (एन-एफआईएस) विकसित किया है जिसमें टीका लगाने के लिए सुई की जरूरत नहीं होती। कंपनी ने हालांकि लेन-देन के वित्तीय विवरण का खुलासा नहीं किया।

एसआईआई के मुख्य कार्यपालक अधिकारी अदार पूनावाला ने कहा, ‘‘इंटीग्रीमेडिकल का एन-एफआईएस दवा वितरण में एक महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतिनिधित्व करता है। हम बिना सुई के टीका लगाने का लक्ष्य रखते हैं। हमारा मानना है कि यह संभावित रूप से हमारे टीके लगाने के तरीके में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है, जिससे यह प्रक्रिया रोगियों तथा स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों के लिए अधिक सुगम होगी।’’

इंटीग्रीमेडिकल के प्रबंध निदेशक सर्वेश मुथा ने कहा, ‘‘यह निवेश हमारी सुई-मुक्त टीका प्रणाली प्रौद्योगिकी की क्षमता और दवा वितरण में क्रांतिकारी बदलाव लाने की क्षमता का प्रमाण है। टीका निर्माण तथा वैश्विक वितरण में एसआईआई की विशेषज्ञता अमूल्य होगी क्योंकि हम अपनी प्रौद्योगिकी को दुनिया भर के मरीजों के लिए अधिक व्यापक रूप से सुलभ बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।’’

 

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